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कार्टूनेचर फ़ीचर सेवा

Friday, December 3, 2010

बगीचा
















एक छोटे बच्चे द्वारा लिखी छोटी-छोटी कहानियों पर कार्टूनिस्ट चन्दर के बनाए चित्रों में से एक चित्र
© T.C. Chander 2010

Wednesday, November 17, 2010

शर्म



वे अब पहले से भी ज्यादा शर्मिन्दा होंगे!

Cartoon © T.C. Chander 2010

Friday, September 17, 2010

कार्टून चोरी


कार्टूनपन्ना (sulekha.com) में प्रदर्शित कई कार्टून चुराकर भारत के हिन्दी समाचार टीवी चैनल सीएनईबी ने अपने एक कार्यक्रम की पृष्ठभूमि में उपयोग किया, वह भी मनमाने ढंग से फ़ेरबदल करके। इस बारे में बारबार लिखने-सम्पर्क करने पर भी कोई लाभ नहीं हुआ। महीनों बाद जब इण्टरनेट पर मैंने लिखा और काफ़ी लोगों को ई-मेल भेजे तब चैनल के मुखिया का एक सन्देश आया जिसमें खेद व्यक्त किया गया था और मेहनताने/क्षतिपूर्ति के रूप में धन भेजने को कहा था।
इस बात को भी कई माह बीत चुके हैं। यह हाल है आर्थिक रूप से सम्पन्न टीवी चैनल का जो अपने कर्म्चारियों को लाखो रुपये वेतन दे देता है, विज्ञापन आदि से कमाता भी है। साथ ही और भी व्यवसाय होंगे। मगर कार्टून चुराकर उपयोग करना ठीक लगता है। किसी रचनाकार की रचना का बिना अनुमति उपयोग करने मे जरा भी शर्म नहीं आती। ऐसा ही एक और उदाहरण है- मध्य प्रदेश से प्रकाशित होने वाले रंगीन हिन्दी दैनिक पीपुल्स समाचार का, इसमें भी मेरा एक कार्टून चुराकर छापा गया। कई बार पत्र लिखने पर भी चुप्पी छाई हुई है।
चित्र : हिन्दी समाचार टीवी चैनल सीएनईबी में चुराए कार्टूनों की पृष्ठभूमि
हिन्दी दैनिक पीपुल्स समाचार छपा में छपा चोरी का कार्टून
कार्टून चोरी (दखलंदाजी में प्रकशित १७.०५.१०)
यहां दिया मेरा बनाया एक कार्टून मध्य प्रदेश से प्रकाशित हो रहे हिन्दी दैनिक अखबार पीपुल्स समाचार ने थोड़ा-सा बदलाव करके अपने कॉलम गुगली में (नीचे दिया लिन्क http://cartoonistchander.blogspot.com हटा कर) १५ मई २०१० को पृष्ठ ४ पर बिना अनुमति/बिना सूचना छाप दिया। यह गुस्ताखीमाफ़ में नियमित रूप से छपने वाले मेरे कार्टूनों में से एक है।
सम्पन्न-समर्थ होने पर भी मुफ़्त का माल उपयोग करने की प्रवृत्ति निन्दनीय है और किसी भी रचनाकार के अधिकारों का हनन तथा कॉपीराइट का उल्लंघन है।
• चन्दर
देखें- १. छपा कार्टून २. मूल कार्टून (बड़े आकार में देखने के लिए छवियों पर क्लिक करें)

Wednesday, September 1, 2010

सुरक्षा

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर मंगल कामना!

जय कन्हैया लाल की!

राजधानी से प्रकाशित हिन्दी दैनिक जनसत्ता में (२८ अगस्त, १९८६) कार्टूनिस्ट चन्दर का कार्टून। तब सुरक्षा कारणों से श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर दिल्ली स्थित लक्ष्मी नारायण मन्दिर में मैटल डिटेक्टर लगाया गया था।

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Cartoon © T.C. Chander 2010

Monday, August 23, 2010

लूट



कहाँ तक नाम गिनवाएं, सभी ने हमको लूटा है...

© T.C. Chander, 2010


Saturday, August 14, 2010

आज़ादी ६३


बधाई!
आज़ादी के ६३ साल
जैसे अपने हिन्दुस्तान/भारत/भारतवर्ष/हिन्द की आज़ादी के ६३ साल अटल सत्य हैं वैसे ही इण्डिया के भी हैं। चोर-बदमाशों-उठाईगीरों-अपराधियों, सरकारी अफ़सरों, पुलिस, नेता-जनप्रतिनिधियों, प्रशासन, न्याय व्यवस्था, ठेकेदार-दलाल-धन्धेबाज़ों, तमाम माफ़ियाओं, खास बड़का पत्रकारों, राष्ट्रीय-बहुराष्ट्रीय कम्पनियों, महंगाई बढ़ने-बढ़ाने इत्यादि की मनमानी आज़ादी भी अटल सत्य है। इनके निरन्तर पोषण से चुसे आम जैसे आम नागरिक का निरन्तर शोषण होते रहना भी तय है। चोर-चोर मौसेरे-चचेरे-फ़ुफ़ेरे...भाई!


भारत के आमजन की आज़ादी १५ अगस्त और २६ जनवरी को कुछ देर हाथ में कागज़की बनी तिरंगी झण्डी पकड़ने तक सीमित हो गयी है। खास जन महंगी खादी पहन खादी का झण्डा फ़हराते हैं। शिक्षा, सुरक्षा, भोजन वगैरह की समस्याओं के साथ-साथ वोटर किस हाल में है, इससे इण्डिया को कोई लेना-देना नहीं। लगभग हर सरकारी विभाग ने उसको निचोड़ने का लाइसेंस ले रखा है। लूटखसोट कर तिजोरियां भरने वालों को खुली छूट है। बेईमान-धोखेबाज़ों की नेताओं से मिलीभगत और आमजन को लूटकर धन कमाने के तमाम उदाहरण मौज़ूद हैं। कुछ ही सालों में अकूत धन कमा लेने वाले लोग विश्व के सबसे धनी लोगों की पंक्ति में जा खड़े हुए हैं। संदिग्ध तरीकों से की गयी इनकी कमाई की जड़ में आम आदमी का इनके लिए कॉमन वैल्थ बन जाना है। कोई देखने-रोकने वाला नहीं है, जो समर्थ हैं उनकी आंखों पर इन धन्धेबाज़ों की बांधी काली कमाई की पट्टी है। भ्रष्टाचार इनका इष्टदेव है सो इनका कुछ बिगड़ने वाला नहीं है।


हर १५ अगस्त और २६ जनवरी को आम आदमी यही सोचता है- चलो १ साल और कट गया। उसके मन में न कोई उत्साह होता है न ही इन राष्ट्रीय त्यौहारों को लेकर कोई खास उमंग। यह स्थिति बदलने का न कोई प्रयास हुआ और न ही इसकी कोई उम्मीद दिखायी देती है। शायद ही कोई हो जिसके मन में इसके लिए प्रयास करने की बात आती हो। खैर, आज़ादी की ६३वीं साल की बहुत-बहुत बधाई...शुभकामना!

-कार्टूनिस्ट चन्दर
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Tuesday, March 2, 2010

बन्सी



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