Sunday, October 23, 2011
शुभ दिवाली
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Saturday, June 18, 2011
ओ.पी. शर्मा
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Friday, May 27, 2011
Fish And Starfish/Book

FISH AND STARFISH- Short Stories by Mahima (USA) and Illustrated by Cartoonist Chander (India)
16 pages book
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Monday, April 18, 2011
सरगम संगम
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Sunday, March 13, 2011
ललित कला महाविद्यालय
ललित कला महाविद्यालय, तिलक मार्ग, नयी दिल्ली, 13 मार्च, 2011
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Wednesday, February 16, 2011
डेटलाइन फ़ोटो कार्टून
डेटलाइन इण्डिया.कॉम में कार्टूनपन्ना से लिया फ़ोटो कार्टून
एक मित्र के सूचना देने पर मैंने देखा कि मेरे बनाए फ़ोटो कार्टून का वरिष्ठ पत्रकार आलोक तोमर की वेबसाइट डेटलाइन इण्डिया.कॉम में मनमाना उपयोग किया गया है। (इसमें कॉपीराइट आज ही दर्ज़ किया है) कार्टूनपन्ना से लिए इस फ़ोटोकार्टून में कुछ और कार्टूनिस्टों के बनाए चेहरे/कैरीकेचर स्वच्छन्द्ता से जोड़े गये हैं। मुफ़्त का माल, नेट है ना। कुछ लोगों ने तो थोक में कार्टून उठाकर लगा रखे हैं, यही नहीं अपनी वेबसाइट का ठप्पा भी उन पर लगा दिया है। फ़िलहाल इसे देखिए-
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Sunday, January 23, 2011
सीनियर इंडिया/बिल्डर
सीनियर इंडिया ने मारा मेरा मेहनताना
कुछ दिन पहले अखबार में खबर छपी कि ’सीनियर बिल्डर’ गिरफ़्तार। पढ़कर आश्चर्य नहीं हुआ। ऐसा होना ही था। सीनियर बिल्डर लिमिटेड यानी एसबीएल कम्पनी मालिक विजय दीक्षित सीनियर मीडिया के भी मालिक हैं। सीनियर मीडिया की पाक्षिक हिन्दी पत्रिका ’सीनियर इंडिया’ के लिए मैंने तत्कालीन सम्पादक और पुराने पत्रकार (दैनिक लोकमत समाचार, नागपुर के पूर्व सम्पादक और मेरे कुछ परिचित) एस.एस विनोद के कहने पर बन्द पड़ी पत्रिका को फ़िर शुरू करने में सहयोग की खातिर ३ दिन लगातार रात-दिन काम किया। इस दौरान मैं अपने एक डिज़ाइनर मित्र और अन्य लोगों के साथ डिफ़ेंस कॉलोनी स्थित पत्रिका कार्यालय में ही रहा। यह पत्रिका मेरे दैनिक जनसत्ता के साथी पत्रकार और सीनियर इंडिया के सम्पादक आलोक तोमर द्वारा एक कार्टून छापने के विवाद या अन्य कारण से उनकी विदाई के बाद बन्द पड़ी थी। दिल्ली के एक बड़े होटल में कम्पनी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पत्रिका बंटनी थी सो किसी भी तरह पत्रिका छापनी ही थी।
इस अंक के लिए आवरण डिज़ाइन, आन्तरिक सज्जा और अनेक चित्र-कार्टून बनाने बाद भी कई अंकों के लिए मैंने पूरी लगन से काम किया। पारिश्रमिक के लिए भी कहता रहा, याद दिलाता रहा। भुगतान के लिए अनेक बार अश्वासन मिले। यहां तक कहा गया कि चैक तैयार है, ले जाएं। इसके लिए सीलिंग के दौरान नोएडा स्थान्तरित हुए दफ़्तर में भी मुझे ३ बार बुलाया गया। लेकिन उस चैक पर मालिक साब यानी विजय दीक्षित के हस्ताक्षर कभी नहीं हुए सो मुझे कभी वह चैक मिला भी नहीं।
किन्हीं कारणों से एस.एन. विनोद की विदाई हो गयी। अब नये सम्पादक आये मेरे एक अन्य मित्र विनोद श्रीवास्तव जो काफ़ी पहले दिल्ली प्रेस में काम करते थे और बाद में मासिक पत्रिका ’मेरी संगिनी’ के सम्पादक रहे। पहले इन्होंने कहा कि पिछला भुगतान हो जाएगा, काम शुरू करो। बाद में कहा कि मालिक से बात हो गयी है, फ़िर कहा कोशिश करूंगा। खैर, सामग्री छपने के ३ महीने बाद भुगतान करने के अपने नियम के तहत वे काम कराते रहे। बाद में कई बार मेरा चैक ’तैयार’ हुआ पर मालिक के दस्तखत न होने से मिला नहीं, हालांकि मुझे चैक लेने के लिए २-३ बार बुलाया भी गया। यों दिल्ली जैसे शहर में डाक, कूरियर या सन्देशवाहक के द्वारा बड़ी आसानी से कोई कागज-दस्तावेज भेजा जा सकता है। पर भेजने की नीयत भी तो होनी चाहिए।
अपने मेहनताने को लेकर मैं काफ़ी सक्रिय रहा। विजय दीक्षित से मिलने की हर कोशिश बेकार रही। अनेकों बार डिफ़ेंस कॉलोनी स्थित दफ़्तर में मैंने सम्बन्धित बिल दिये, मालिक को अनेक बार ई-मेल किए पर कोई नतीजा नहीं निकला। मेरा कुल पारिश्रमिक ३४४५०.०० रुपये (चौंतीस हजार चार सौ पचास रुपये) है जो अनेक प्रयासों के बाद भी आज तक नहीं मिला। यह मेहनताना सन २००६, २००७ और २००९ का है।
कुछ लोगों को अखबार-पत्रिका निकालने की बीमारी चार पैसे जेब में आते ही लग जाती है। जल्दी ही वे अपना मीडिया हाउस बना लेना चाहते हैं ताकि अपने अनेक उल्टे-सीधे काम कराने या धोंस जमाने के लिए उसका इस्तेमाल कर सकें।
मैं यही चाहता हूं कि मेरे जैसे फ़्रीलांस काम करने वाले मित्र ऐसे लोगों से जरूरत से ज्यादा सावधान रहें और ऐसे लोगों को बेनकाब भी करें ताकि अन्य मेहनती लोग इनके शोषण के शिकार न हों।
इसी तरह और भी अनुभव हुए हैं- नौकरी और फ़्रीलांस काम करने के दौरान, फ़िर बताऊंगा।
----- क्लिक मारकर इन्हें देखिए --------
कार्टूनेचर शिकायत बोल कार्टूनिस्ट चन्दर कार्टूनपन्ना कार्टूनकाल टूनजोक मुस्कानदूत टूनकाल सहयात्रा कार्टून इन्स्टीट्यूट कार्टून होली कार्टून न्यूज़ हिन्दी युवाउमंग कार्टूनिस्ट्स’ क्लब ऑफ़ इण्डिया
कुछ दिन पहले अखबार में खबर छपी कि ’सीनियर बिल्डर’ गिरफ़्तार। पढ़कर आश्चर्य नहीं हुआ। ऐसा होना ही था। सीनियर बिल्डर लिमिटेड यानी एसबीएल कम्पनी मालिक विजय दीक्षित सीनियर मीडिया के भी मालिक हैं। सीनियर मीडिया की पाक्षिक हिन्दी पत्रिका ’सीनियर इंडिया’ के लिए मैंने तत्कालीन सम्पादक और पुराने पत्रकार (दैनिक लोकमत समाचार, नागपुर के पूर्व सम्पादक और मेरे कुछ परिचित) एस.एस विनोद के कहने पर बन्द पड़ी पत्रिका को फ़िर शुरू करने में सहयोग की खातिर ३ दिन लगातार रात-दिन काम किया। इस दौरान मैं अपने एक डिज़ाइनर मित्र और अन्य लोगों के साथ डिफ़ेंस कॉलोनी स्थित पत्रिका कार्यालय में ही रहा। यह पत्रिका मेरे दैनिक जनसत्ता के साथी पत्रकार और सीनियर इंडिया के सम्पादक आलोक तोमर द्वारा एक कार्टून छापने के विवाद या अन्य कारण से उनकी विदाई के बाद बन्द पड़ी थी। दिल्ली के एक बड़े होटल में कम्पनी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पत्रिका बंटनी थी सो किसी भी तरह पत्रिका छापनी ही थी। इस अंक के लिए आवरण डिज़ाइन, आन्तरिक सज्जा और अनेक चित्र-कार्टून बनाने बाद भी कई अंकों के लिए मैंने पूरी लगन से काम किया। पारिश्रमिक के लिए भी कहता रहा, याद दिलाता रहा। भुगतान के लिए अनेक बार अश्वासन मिले। यहां तक कहा गया कि चैक तैयार है, ले जाएं। इसके लिए सीलिंग के दौरान नोएडा स्थान्तरित हुए दफ़्तर में भी मुझे ३ बार बुलाया गया। लेकिन उस चैक पर मालिक साब यानी विजय दीक्षित के हस्ताक्षर कभी नहीं हुए सो मुझे कभी वह चैक मिला भी नहीं।
किन्हीं कारणों से एस.एन. विनोद की विदाई हो गयी। अब नये सम्पादक आये मेरे एक अन्य मित्र विनोद श्रीवास्तव जो काफ़ी पहले दिल्ली प्रेस में काम करते थे और बाद में मासिक पत्रिका ’मेरी संगिनी’ के सम्पादक रहे। पहले इन्होंने कहा कि पिछला भुगतान हो जाएगा, काम शुरू करो। बाद में कहा कि मालिक से बात हो गयी है, फ़िर कहा कोशिश करूंगा। खैर, सामग्री छपने के ३ महीने बाद भुगतान करने के अपने नियम के तहत वे काम कराते रहे। बाद में कई बार मेरा चैक ’तैयार’ हुआ पर मालिक के दस्तखत न होने से मिला नहीं, हालांकि मुझे चैक लेने के लिए २-३ बार बुलाया भी गया। यों दिल्ली जैसे शहर में डाक, कूरियर या सन्देशवाहक के द्वारा बड़ी आसानी से कोई कागज-दस्तावेज भेजा जा सकता है। पर भेजने की नीयत भी तो होनी चाहिए। अपने मेहनताने को लेकर मैं काफ़ी सक्रिय रहा। विजय दीक्षित से मिलने की हर कोशिश बेकार रही। अनेकों बार डिफ़ेंस कॉलोनी स्थित दफ़्तर में मैंने सम्बन्धित बिल दिये, मालिक को अनेक बार ई-मेल किए पर कोई नतीजा नहीं निकला। मेरा कुल पारिश्रमिक ३४४५०.०० रुपये (चौंतीस हजार चार सौ पचास रुपये) है जो अनेक प्रयासों के बाद भी आज तक नहीं मिला। यह मेहनताना सन २००६, २००७ और २००९ का है।
| विजय दिक्षित |
मैं यही चाहता हूं कि मेरे जैसे फ़्रीलांस काम करने वाले मित्र ऐसे लोगों से जरूरत से ज्यादा सावधान रहें और ऐसे लोगों को बेनकाब भी करें ताकि अन्य मेहनती लोग इनके शोषण के शिकार न हों।
इसी तरह और भी अनुभव हुए हैं- नौकरी और फ़्रीलांस काम करने के दौरान, फ़िर बताऊंगा।
----- क्लिक मारकर इन्हें देखिए --------
कार्टूनेचर शिकायत बोल कार्टूनिस्ट चन्दर कार्टूनपन्ना कार्टूनकाल टूनजोक मुस्कानदूत टूनकाल सहयात्रा कार्टून इन्स्टीट्यूट कार्टून होली कार्टून न्यूज़ हिन्दी युवाउमंग कार्टूनिस्ट्स’ क्लब ऑफ़ इण्डिया
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Friday, December 3, 2010
बगीचा
एक छोटे बच्चे द्वारा लिखी छोटी-छोटी कहानियों पर कार्टूनिस्ट चन्दर के बनाए चित्रों में से एक चित्र
© T.C. Chander 2010
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Wednesday, November 17, 2010
शर्म
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Friday, September 17, 2010
कार्टून चोरी
कार्टूनपन्ना (sulekha.com) में प्रदर्शित कई कार्टून चुराकर भारत के हिन्दी समाचार टीवी चैनल सीएनईबी ने अपने एक कार्यक्रम की पृष्ठभूमि में उपयोग किया, वह भी मनमाने ढंग से फ़ेरबदल करके। इस बारे में बारबार लिखने-सम्पर्क करने पर भी कोई लाभ नहीं हुआ। महीनों बाद जब इण्टरनेट पर मैंने लिखा और काफ़ी लोगों को ई-मेल भेजे तब चैनल के मुखिया का एक सन्देश आया जिसमें खेद व्यक्त किया गया था और मेहनताने/क्षतिपूर्ति के रूप में धन भेजने को कहा था।इस बात को भी कई माह बीत चुके हैं। यह हाल है आर्थिक रूप से सम्पन्न टीवी चैनल का जो अपने कर्म्चारियों को लाखो रुपये वेतन दे देता है, विज्ञापन आदि से कमाता भी है। साथ ही और भी व्यवसाय होंगे। मगर कार्टून चुराकर उपयोग करना ठीक लगता है। किसी रचनाकार की रचना का बिना अनुमति उपयोग करने मे जरा भी शर्म नहीं आती। ऐसा ही एक और उदाहरण है- मध्य प्रदेश से प्रकाशित होने वाले रंगीन हिन्दी दैनिक पीपुल्स समाचार का, इसमें भी मेरा एक कार्टून चुराकर छापा गया। कई बार पत्र लिखने पर भी चुप्पी छाई हुई है।
चित्र : हिन्दी समाचार टीवी चैनल सीएनईबी में चुराए कार्टूनों की पृष्ठभूमि
हिन्दी दैनिक पीपुल्स समाचार छपा में छपा चोरी का कार्टूनकार्टून चोरी (दखलंदाजी में प्रकशित १७.०५.१०)
यहां दिया मेरा बनाया एक कार्टून मध्य प्रदेश से प्रकाशित हो रहे हिन्दी दैनिक अखबार पीपुल्स समाचार ने थोड़ा-सा बदलाव करके अपने कॉलम गुगली में (नीचे दिया लिन्क http://cartoonistchander.blogspot.com हटा कर) १५ मई २०१० को पृष्ठ ४ पर बिना अनुमति/बिना सूचना छाप दिया। यह गुस्ताखीमाफ़ में नियमित रूप से छपने वाले मेरे कार्टूनों में से एक है।
सम्पन्न-समर्थ होने पर भी मुफ़्त का माल उपयोग करने की प्रवृत्ति निन्दनीय है और किसी भी रचनाकार के अधिकारों का हनन तथा कॉपीराइट का उल्लंघन है।
• चन्दर
देखें- १. छपा कार्टून २. मूल कार्टून (बड़े आकार में देखने के लिए छवियों पर क्लिक करें)

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