....................................................................................................................................................................
Monday, June 30, 2014
Thursday, January 23, 2014
Monday, January 13, 2014
क्लाइमेटून
लेबल:
climate,
climatoon,
global warming,
nature,
toon
Sunday, December 29, 2013
पुरस्कार
फ़्रीलांस कार्टूनिस्ट का पुरस्कार चन्दर को
पिछले दिनों महामना मदन मोहन मालवीय जयन्ती के अवसर पर २४ दिसम्बर २०१३ को मेवाड़ इंस्टीट्यूट, वसुन्धरा (गाज़ियाबाद) में वरिष्ठ पत्रकार श्री बनवारी ने कार्टूनिस्ट चन्दर को वर्ष २०१३ का अच्छे स्वतन्त्र व्यंग्यचित्रकार (फ़्रीलांस कार्टूनिस्ट) का पुरस्कार प्रदान किया। कार्टूनिस्ट को प्रशस्ति पत्र, मेवाड़ इंस्टीट्यूट के प्रतीक चिन्ह व शॉल के साथ-साथ एक लिफ़ाफ़ा भी दिया गया।
इस अवसर पर संयोग की बात- मंच पर उपस्थित सर्वश्री बनवारी, राम बहादुर राय, अरविन्द मोहन और जगदीश उपासने सभी उस समय के धांसू अखबार ‘जनसत्ता’ में कार्यरत थे जब मैंने एक साल जनसत्ता में नियमित कार्टूनिस्ट के रूप में कार्य किया। और काक साहब जनसत्ता के पहले कार्टूनिस्ट थे ही, सभी जानते हैं। दूसरा नम्बर अपना था।
• वरुण
पिछले दिनों महामना मदन मोहन मालवीय जयन्ती के अवसर पर २४ दिसम्बर २०१३ को मेवाड़ इंस्टीट्यूट, वसुन्धरा (गाज़ियाबाद) में वरिष्ठ पत्रकार श्री बनवारी ने कार्टूनिस्ट चन्दर को वर्ष २०१३ का अच्छे स्वतन्त्र व्यंग्यचित्रकार (फ़्रीलांस कार्टूनिस्ट) का पुरस्कार प्रदान किया। कार्टूनिस्ट को प्रशस्ति पत्र, मेवाड़ इंस्टीट्यूट के प्रतीक चिन्ह व शॉल के साथ-साथ एक लिफ़ाफ़ा भी दिया गया।
इस अवसर पर संयोग की बात- मंच पर उपस्थित सर्वश्री बनवारी, राम बहादुर राय, अरविन्द मोहन और जगदीश उपासने सभी उस समय के धांसू अखबार ‘जनसत्ता’ में कार्यरत थे जब मैंने एक साल जनसत्ता में नियमित कार्टूनिस्ट के रूप में कार्य किया। और काक साहब जनसत्ता के पहले कार्टूनिस्ट थे ही, सभी जानते हैं। दूसरा नम्बर अपना था।
• वरुण
Friday, December 27, 2013
मुस्कान
जय मुस्कान!
मेरे कार्टूनिस्ट और कर्टूनप्रेमी मित्रो, मेरा विचार है कि अच्छे कार्टूनों का हिन्दी में एक टेब्लॉइड पीडीएफ़ अखबार निकाला जाए। इस अखबार में कार्टून की अधिकता हो और टाइप की हुई सामग्री न्यूनतम हो यानी आम अखबारों के उलट। यों अभी अखबारों ने कार्टून कला की ओर से मुंह फ़ेर लिया है। कार्टून फ़ोकट की चीज़ बनकर रह गये हैं जो कार्टूनिस्टों के द्वारा इण्टरनेट पर सहज उपलब्ध करा दिये जाते हैं। इस कार्टून प्रधान अखबार को अभी या बाद में अखबारी कागज़ पर छापा जाए- साधन होने पर। अभी इस अखबार को पीडीएफ़ के रूप में देस-विदेश में ई-मेल द्वारा सदस्यों को भेजा जाए। ज़ाहिर है इसके लिए अच्छे कार्टूनों की आवश्यकता होगी ही। रोना वही कि फ़िलहाल मेहनताना नहीं दिया जा सकता। इसके लिए सक्षम होने का प्रयास किया जाएगा, शुरूआत तो हो! सामग्री में विविधता होगी. यह पक्का है। आप लोगों की सहमति हो तो एक अंक बनाया जाए। पर इसके लिए कुछ कार्टूनिस्ट मित्रों के ५ (छपे/बिन छपे) कार्टून/कार्टून स्ट्रिप/कैरीकेचर/फ़ीचर, सचित्र (फ़ोटो सहित) आत्म परिचय वगैरह चाहिए ही चाहिए। कार्यक्रम तय होने पर व्यवस्था हेतु दक्षिणा १०१ (101) या ९९ (99) रुपये रुचि रखने वाले कार्टून प्रेमी यह मामूली सहयोग देंगे तो गाड़ी चल पड़ेगी। इस कार्य में प्रायोजक या विज्ञापन दाता का सहयोग सन्देहात्मक है। वैसे यदि आपके सम्पर्क में कार्टून प्रेमी प्रायोजक या विज्ञापन दाता हैं तो उनको इस पावन कार्य में पुण्य कमाने का न्यौता हैं। उल्लेखनीय है कि मेरा यह प्रयास हम सभी या अधिकतम कार्टूनिस्टों का एक अच्छा मंच बनाने की दिशा में एक कदम है व्यवसाय या धन्धा नहीं। कुछ और जानना-पूछना चाहें तो बिना संकोच सम्पर्क करें- फ़ेसबुक के माध्यम से या cartoonistchander@gmail.com (यहां मेरे हिन्दी पाक्षिक ‘मीडिया नेटवर्क’ के एक पुराने अंक के २ पृष्ठ दिये गये हैं, देखें) लिन्क- http://www.medianetworkweb.blogspot.in/

मेरे कार्टूनिस्ट और कर्टूनप्रेमी मित्रो, मेरा विचार है कि अच्छे कार्टूनों का हिन्दी में एक टेब्लॉइड पीडीएफ़ अखबार निकाला जाए। इस अखबार में कार्टून की अधिकता हो और टाइप की हुई सामग्री न्यूनतम हो यानी आम अखबारों के उलट। यों अभी अखबारों ने कार्टून कला की ओर से मुंह फ़ेर लिया है। कार्टून फ़ोकट की चीज़ बनकर रह गये हैं जो कार्टूनिस्टों के द्वारा इण्टरनेट पर सहज उपलब्ध करा दिये जाते हैं। इस कार्टून प्रधान अखबार को अभी या बाद में अखबारी कागज़ पर छापा जाए- साधन होने पर। अभी इस अखबार को पीडीएफ़ के रूप में देस-विदेश में ई-मेल द्वारा सदस्यों को भेजा जाए। ज़ाहिर है इसके लिए अच्छे कार्टूनों की आवश्यकता होगी ही। रोना वही कि फ़िलहाल मेहनताना नहीं दिया जा सकता। इसके लिए सक्षम होने का प्रयास किया जाएगा, शुरूआत तो हो! सामग्री में विविधता होगी. यह पक्का है। आप लोगों की सहमति हो तो एक अंक बनाया जाए। पर इसके लिए कुछ कार्टूनिस्ट मित्रों के ५ (छपे/बिन छपे) कार्टून/कार्टून स्ट्रिप/कैरीकेचर/फ़ीचर, सचित्र (फ़ोटो सहित) आत्म परिचय वगैरह चाहिए ही चाहिए। कार्यक्रम तय होने पर व्यवस्था हेतु दक्षिणा १०१ (101) या ९९ (99) रुपये रुचि रखने वाले कार्टून प्रेमी यह मामूली सहयोग देंगे तो गाड़ी चल पड़ेगी। इस कार्य में प्रायोजक या विज्ञापन दाता का सहयोग सन्देहात्मक है। वैसे यदि आपके सम्पर्क में कार्टून प्रेमी प्रायोजक या विज्ञापन दाता हैं तो उनको इस पावन कार्य में पुण्य कमाने का न्यौता हैं। उल्लेखनीय है कि मेरा यह प्रयास हम सभी या अधिकतम कार्टूनिस्टों का एक अच्छा मंच बनाने की दिशा में एक कदम है व्यवसाय या धन्धा नहीं। कुछ और जानना-पूछना चाहें तो बिना संकोच सम्पर्क करें- फ़ेसबुक के माध्यम से या cartoonistchander@gmail.com (यहां मेरे हिन्दी पाक्षिक ‘मीडिया नेटवर्क’ के एक पुराने अंक के २ पृष्ठ दिये गये हैं, देखें) लिन्क- http://www.medianetworkweb.blogspot.in/

Wednesday, December 18, 2013
Wednesday, July 3, 2013
देशभक्ति
बचपनिया देशभक्ति
मेरे जीवन की यह बेवकूफ़ी भरी घटना काफ़ी पुरानी यानी भारत-चीन युद्ध यानी सन १९६२ की है। तब मैं लगभग ८ साल का था। पिताजी तब मध्य प्रदेश के कौलारस में विद्यालय निरीक्षक थे। उनके साथ रेडियो पर युद्ध के समाचारों में युद्ध के लिए धन-सोने और घायल सैनिकों के लिए रक्तदान के बारे में सुनता था। एक दिन मैंने भी जवानों के लिए खून देने का निश्चय कर लिया।
रसोई से निकल की पॉलिश वाला पीतल एक बड़ा गिलास ले लिया और पिताजी के दाढ़ी बनाने के सामान में से एक ब्लेड भी ले लिया। आंगन में एक पेड़ के नीचे बैठकर मैने अपने बायें हाथ की पहली उंगली (तर्ज़नी) पर नाखून से लगभग १/२ इंच ऊपर ब्लेड से एक बड़ा कट मार दिया। अपने बायें हाथ को गिलास में लटका दिया और दायें से गिलास को ढंक लिया ताकि जवानों को दिया जाने वाला खून धूल आदि से दूषित न हो जाए।
तभी मेरी माताजी ने आकर देख लिया। वे घबरा गयीं। संयोग से पिताजी घर पर ही थे। वे भी आ गये।
उन्होंने खून बहना बन्द करने के लिए तुरन्त मेरा हाथ ऊंचा किया और पट्टे बांधी। बाद में उन्होंने समझाया कि जवानों के लिए रक्तदान कैसे किया जाता है। तुम्हारे जैसे बच्चों का खून नहीं लिया जाता। ऐसी बेवकूफ़ी अब कभी मत करना।
अनेक बार मेरी इस बेवकूफ़ी की चर्चा हमारे यहां हुई। अब भी मेरी उंगली पर कटे का हलका निशान मौजूद है- बचपन की देशभक्ति के चिन्ह के रूप में!
• कार्टूनिस्ट चन्दर
रसोई से निकल की पॉलिश वाला पीतल एक बड़ा गिलास ले लिया और पिताजी के दाढ़ी बनाने के सामान में से एक ब्लेड भी ले लिया। आंगन में एक पेड़ के नीचे बैठकर मैने अपने बायें हाथ की पहली उंगली (तर्ज़नी) पर नाखून से लगभग १/२ इंच ऊपर ब्लेड से एक बड़ा कट मार दिया। अपने बायें हाथ को गिलास में लटका दिया और दायें से गिलास को ढंक लिया ताकि जवानों को दिया जाने वाला खून धूल आदि से दूषित न हो जाए।तभी मेरी माताजी ने आकर देख लिया। वे घबरा गयीं। संयोग से पिताजी घर पर ही थे। वे भी आ गये।
उन्होंने खून बहना बन्द करने के लिए तुरन्त मेरा हाथ ऊंचा किया और पट्टे बांधी। बाद में उन्होंने समझाया कि जवानों के लिए रक्तदान कैसे किया जाता है। तुम्हारे जैसे बच्चों का खून नहीं लिया जाता। ऐसी बेवकूफ़ी अब कभी मत करना।
अनेक बार मेरी इस बेवकूफ़ी की चर्चा हमारे यहां हुई। अब भी मेरी उंगली पर कटे का हलका निशान मौजूद है- बचपन की देशभक्ति के चिन्ह के रूप में!
• कार्टूनिस्ट चन्दर
Saturday, June 1, 2013
Hospital to home
1. Drawing cartoon from ventilator bed-I
Cartoonist TC Chander drawing cartoon from his ventilator bed, while he was admitted at Sant Paramanand Hospital, Civil Lines in Delhi.
(19th May, 2013, 04 47 46 pm)
2. Drawing cartoon from ventilator bed-IICartoonist TC Chander drawing cartoon from his ventilator bed, while he was admitted at Sant Paramanand Hospital, Civil Lines in Delhi.
(19th May, 2013, 04 47 46 pm)
Cartoonist T C Chander drawing cartoon from his ventilator bed, while he was admitted at Sant Paramanand Hospital in Delhi.
(19th May, 2013, 04 50 32 pm)
Hospital to home
May 17-24, 2013

Sunday, September 30, 2012
फ़ोटो कार्टून
ऐसे बनते हैं फ़ोटो कार्टून
आइए, देखिए फ़ोटो कार्टून जो मैंने सम्वाद/बिना सम्वाद के अपने हिन्दी पाक्षिक ‘मीडिया नेटवर्क’ के लिए बनाए थे।
एक पाठक द्वारा फ़ोटो कार्टून के बारे में पूछे जाने पर इसको लेकर तब सम्वाददाता उमा शंकर ने मुझसे बातचीत करके लिखा था- ऐसे बनते हैं फ़ोटो कार्टून। (मीडिया नेटवर्क, १५, नवम्बर, १९९२)
आइए, देखिए फ़ोटो कार्टून जो मैंने सम्वाद/बिना सम्वाद के अपने हिन्दी पाक्षिक ‘मीडिया नेटवर्क’ के लिए बनाए थे।एक पाठक द्वारा फ़ोटो कार्टून के बारे में पूछे जाने पर इसको लेकर तब सम्वाददाता उमा शंकर ने मुझसे बातचीत करके लिखा था- ऐसे बनते हैं फ़ोटो कार्टून। (मीडिया नेटवर्क, १५, नवम्बर, १९९२)
Friday, September 14, 2012
चौधराहट
प्रिय कार्टूनिस्ट बन्धु
विस्वास है स्वस्थ-प्रसन्न होंगे।
क्या आपने मान्य इरफ़ान खान को असीम त्रिवेदी के कार्टूनों को लेकर निंदा करने के लिए अधिकृत किया है? स्वयं देखें, असीम के बहाने कार्टूनिस्टों का स्वयंभू प्रतिनिधि/मुखिया बनने का प्रयास किया जा रहा है।
-चन्दर
.............................................................
असीम के बहाने चौधराहट
हाल ही में कार्टूनिस्ट असीम के कार्टूनों को लेकर दिल्ली के एक अखबार में इरफ़ान खान का एक लेख छपा है जिसमें उन्होंने लिखा है-
(१) मैं कार्टूनिस्ट बिरादरी की तरफ़ से इसकी निंदा करता हूं। (२) हम पूरी कार्टूनिस्ट बिरादरी इसकी निंदा करते हैं।
(चित्र देखें)
भैया, क्या आपको तमाम कार्टूनिस्टों ने अपना चौधरी नियुक्त कर दिया है? आप कार्टूनिस्टों के धर्मगुरु या मुखिया नहीं हैं। किसी विषय पर आप व्यक्तिगत राय देने के लिए स्वतन्त्र हैं। आपको लिखने और किसी भी अखबार-पत्रिका-वेबसाइट को छापने की पूरी आज़ादी है पर सभी कार्टूनिस्टों के ठेकेदार मत बनिए। यह जरूरी नहीं कि आपके विचारों से सभी कार्टूनिस्ट सहमत हों या आप जैसा कार्टूनिस्ट अन्य के विचारों से सहमत हो। क्या आपको सभी कार्टूनिस्टों ने अपनी ओर से निंदा करने को अधिकृत कर दिया है? अच्छा यही है कि आप अपने तक ही सीमित रहें।
विस्वास है स्वस्थ-प्रसन्न होंगे।
क्या आपने मान्य इरफ़ान खान को असीम त्रिवेदी के कार्टूनों को लेकर निंदा करने के लिए अधिकृत किया है? स्वयं देखें, असीम के बहाने कार्टूनिस्टों का स्वयंभू प्रतिनिधि/मुखिया बनने का प्रयास किया जा रहा है।
-चन्दर
.............................................................
असीम के बहाने चौधराहट
हाल ही में कार्टूनिस्ट असीम के कार्टूनों को लेकर दिल्ली के एक अखबार में इरफ़ान खान का एक लेख छपा है जिसमें उन्होंने लिखा है-
(१) मैं कार्टूनिस्ट बिरादरी की तरफ़ से इसकी निंदा करता हूं। (२) हम पूरी कार्टूनिस्ट बिरादरी इसकी निंदा करते हैं।
(चित्र देखें)
भैया, क्या आपको तमाम कार्टूनिस्टों ने अपना चौधरी नियुक्त कर दिया है? आप कार्टूनिस्टों के धर्मगुरु या मुखिया नहीं हैं। किसी विषय पर आप व्यक्तिगत राय देने के लिए स्वतन्त्र हैं। आपको लिखने और किसी भी अखबार-पत्रिका-वेबसाइट को छापने की पूरी आज़ादी है पर सभी कार्टूनिस्टों के ठेकेदार मत बनिए। यह जरूरी नहीं कि आपके विचारों से सभी कार्टूनिस्ट सहमत हों या आप जैसा कार्टूनिस्ट अन्य के विचारों से सहमत हो। क्या आपको सभी कार्टूनिस्टों ने अपनी ओर से निंदा करने को अधिकृत कर दिया है? अच्छा यही है कि आप अपने तक ही सीमित रहें।
लेबल:
aseem,
bharat,
cartoon,
cartoon news,
cartoonist,
india
Subscribe to:
Posts (Atom)
ताज़ा सामग्री
-
एक छोटे बच्चे द्वारा लिखी छोटी-छोटी कहानियों पर कार्टूनिस्ट चन्दर के बनाए चित्रों में से एक चित्र © T.C. Chander 2010
-
राम, लक्ष्मण और सीता अशोक वाटिका में सीता रावण के दरबार में हनुमान हनुमान और जलती लंका हनुमान और द्रो...
-
कार्टूनिस्ट्स' क्लब ऑफ़ इण्डिया ’कार्टूनिस्ट्स' क्लब ऑफ़ इण्डिया’ कार्टूनिस्टों की संस्था/संगठन का वास्तविक नाम नहीं था। यह किसी...
-
यह क्या-क्यों हो रहा है भैया कश्मीर घाटी में १० साल पहले ५०% हिंदू थे, आज एक भी हिंदू नहीं बचा ! केरल में १० साल पहले तक ६०% जनसंख्या हि...
-
सीनियर इंडिया ने मारा मेरा मेहनताना कुछ दिन पहले अखबार में खबर छपी कि ’सीनियर बिल्डर’ गिरफ़्तार। पढ़कर आश्चर्य नहीं हुआ। ऐसा होना ही था...
-
डेटलाइन इण्डिया.कॉम में कार्टूनपन्ना से लिया फ़ोटो कार्टून एक मित्र के सूचना देने पर मैंने देखा कि मेरे बनाए फ़ोटो कार्टून का वरिष्ठ पत्रक...
-
बचपनिया देशभक्ति मेरे जीवन की यह बेवकूफ़ी भरी घटना काफ़ी पुरानी यानी भारत-चीन युद्ध यानी सन १९६२ की है। तब मैं लगभग ८ साल का था। पि...









