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कार्टूनेचर फ़ीचर सेवा

Thursday, August 14, 2014

आज सुबह

हम कब सुधरेंगे 
आज काफ़ी दिनों के बाद निकट के जनकपुरी जिला उद्यान यानी डिस्ट्रिक्ट पार्क (दिल्ली में ही) जाकर डेड़-दो घण्टे बैठने का अवसर मिला। जमकर ऑक्सीजन का सेवन किया। एक सप्ताह पहले तक घर पर मशीन/सिलेण्डर का उपयोग करना पड़ रहा था। यह देखकर कष्ट होता है कि हम खुद को बदल नहीं पाते। या कहें कि ’कौन देखता है!’ सोचकर उचित-अनुचित कुछ भी करते रहते हैं। अब देखिए, पार्क साफ़ सुथरा हो तो अच्छा लगता है। अपने घर में हम ऐसा क्यों नहीं करते? वह हमारा घर है इसीलिए न! यहां थैलियां, गिलास, नाना प्रकार के पाउच आदि कूड़ा-कचरा तो है ही, लोगों ने इसे दारूबाजी का अड्डा भी बना डाला है। एक सेवा (शायद) निवृत सज्जन पास ही खुले आम निवृत हो रहे हैं। यहां कुत्तों द्वारा मस्ती मारना तो मामूली बात है। हम कब सुधरेंगे/बदलेंगे...शायद कभी नहीं...
युवा पीढ़ी का फ़ुटबाल प्रेम

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